रिपोर्ट पवन पाठक
मुंबई: मुंबई महानगरपालिका के L विभाग की अशासकीय सदस्य चयन प्रक्रिया में शिंदेy गुट के विधायक दिलीप लांडे के बेटे प्रणव लांडे को झटका लगा है। अशासकीय सदस्यों के नामनिर्देशन के लिए रखे गए प्रस्ताव को समिति में बहुमत नहीं मिला और प्रणव लांडे समेत तीन उम्मीदवारों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
11 सदस्यों ने किया मतदान
L प्रभाग समिति में हुए मतदान में 11 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इनमें से 9 सदस्यों ने प्रस्ताव के विरोध में, जबकि केवल 2 सदस्यों ने समर्थन में मतदान किया। रिपोर्ट के अनुसार समिति में कुल 13 सदस्य थे और 2 सदस्य तटस्थ रहे।
इस तरह प्रणव लांडे समेत तीनों अशासकीय एवं संस्थागत सदस्यों के नामनिर्देशन का प्रस्ताव मंजूर नहीं हो सका।
शिवसेना के सदस्यों ने भी किया विरोध
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि प्रस्ताव का विरोध करने वालों में शिवसेना के सदस्य किरण लांडगे और मीनल तुरडे के नाम भी सामने आए हैं। वहीं BJP के नगरसेवक हरीश भांदिर्गे ने भी प्रस्ताव के विरोध में भूमिका निभाई। इससे शिवसेना के भीतर और महायुति में स्थानीय स्तर पर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।
17 आवेदन, सिर्फ 3 उम्मीदवार पात्र
L विभाग की अशासकीय और संस्थागत सदस्य नियुक्ति प्रक्रिया के लिए 8 मई को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद कुल 17 आवेदन प्राप्त हुए। दस्तावेजों की जांच के बाद प्रणव लांडे समेत केवल तीन उम्मीदवार पात्र पाए गए थे।
इन तीनों के नाम नियुक्ति के लिए L प्रभाग समिति की बैठक में रखे गए, लेकिन सदस्यों के विरोध के बाद प्रस्ताव पर मतदान कराया गया। बहुमत प्रस्ताव के खिलाफ जाने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया रुक गई।
क्या किसी ने चुनाव जीता?
यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है। यह सामान्य चुनाव नहीं था जिसमें प्रणव लांडे के सामने कोई दूसरा उम्मीदवार जीत गया हो। यह अशासकीय एवं संस्थागत सदस्यों के नामनिर्देशन का प्रस्ताव था।
इसलिए सही तरीके से कहा जाए तो प्रणव लांडे के नाम का प्रस्ताव बहुमत नहीं मिलने के कारण फेटाळला गया और उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी।
प्रणव लांडे के पिता दिलीप लांडे शिंदे गुट के विधायक हैं। ऐसे में विधायक पुत्र का प्रस्ताव खारिज होना स्थानीय मुंबई राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
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