MPSC परीक्षा में गड़बड़ियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति, IAS तुकाराम मुंढे को मिली जिम्मेदारी



रिपोर्ट पवन पाठक , 
मुंबई: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है। समिति की अध्यक्षता बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है।

पुणे में MPSC अभ्यर्थियों द्वारा कई दिनों से किए जा रहे आंदोलन के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे।

समिति में IPS अधिकारी लक्ष्मी गौतम, सेवानिवृत्त IAS अधिकारी गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाईक भी शामिल हैं। समिति कथित अनियमितताओं की जांच करने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगी।

इस मामले में MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने भी जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की घोषणा की है। आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने आयोग की जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी।

सरकार की ओर से अगले तीन वर्षों में विभिन्न विभागों के 70,000 रिक्त पदों पर भर्ती करने का आश्वासन भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त, 2027 की ग्रुप C भर्ती परीक्षा के माध्यम से भरे जाने वाले पदों की संख्या बढ़ाने और आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दों पर भी सहमति जताई गई है।

अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों और सरकार द्वारा की जाने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि MPSC की परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया में किस प्रकार के सुधार लागू किए जाएंगे।

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